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Showing posts from 2015

मेरी मधुशाला

राह पकड़ कर एक चला था पाने को मैं  मधुशाला राह नयी थी चाह नयी थी था चारो औ अँधियारा ना समझ थी न अकल थी था निर्मल भोला भाला पथ पर  मुझको चलते चलते भोरे मिली एक मधुशाला देख अचंभित हो प्रफुल्ल्ति कांप उठी मेरी  काया पग आगे लूँ या मूड़ जाऊँ सोच रहा था वो प्यारा डरते डरते पग उठाके उसकी चौखठ को लांगा ना होली थी ना ही दिवाली था मैं  अकेला पीनेवाला झिझक झिझक कर रुक रुक कर फिर मैंने  साकी से माँगा पर माँगा भी तो क्या माँगा माँगा जल का एक प्याला अब बैठा असमंजस में मैं देख रहा अपना प्याला क्यों माँगा जल मैंने जब पीनी मुझको  थी हाला अब शर्मा कर के हूँ  बैठा सोच रहा क्या कर डाला अब कैसे मांगू मैं अमृत क्या सोचेगी मधुशाला इतने में डगमग करता आया एक पीनेवाला होश नहीं था खबर  नहीं थी क्या शाळा से उसने माँगा एक घूँट में उसने पी कर प्याले को थल पे मारा छोड़ दिया उसने वो आँगन तोड़ दिया उसने प्याला देख मिट्टी को मिट्टी होता शोक मनाती मधुशाला व्याकुलता से मैंने देखा जल उ...

The Friend

You work with me and sit across the desk We have lunches together and coffee breaks We burn the midnight oil, to meet the deadlines And party like crazy, on Friday nights You have seen me on bright sunny days And when sky was cloudy and full of grays You know all about the colleague I dated And why our relationship was ill fated We have fun together and life is good Filled with laughter, tears, wine and food But answer me this, my dear friend Would I call you my real friend? You are my roomie and we share a home Most dinners we have together but some alone We have made memories of far flung lands And have gotten over our fears, holding hands We trade our stories of the day, every day And discuss how to make it better in any way You know me and my parents And our bond is deeper than sharing rent In fact O! My parents know you so well They you consider you their own, as I can tell But riddle me this, my dear friend Would I call you my rea...

ढूंढ़ते रह जाओगे

दिवाली में घर को रंगाना पूताना कचरे हटा कर फिर उसको सजाना  सड़क पे बोतल मे राकेट का उड़ाना  मोहल्ले में बड़ो का आशीर्वाद पाना  होली में पानी के गुब्बारे बनाना  पडोसी की टंकी में रंगो को मिलाना  नहा कर दोबारा फिर रंगीन हो जाना और हफ्ते भर घस उन रंगो को छुड़ाना  छुट्टिओं में रिश्तेदारों  से मिलने जाना  बड़े बुजुर्गो का फिर वो कहानी सुनाना   फर्श पर फिर सबके बिछावन लगाना  और सोने की जगह  बस गप्पे लड़ाना  मूंगफली के छिलकों का पहाड़ बनाना  आम को पेड़ो से चुरा  कर के खाना  भरी धूप में उन पापड़ों को सुखाना  खट्टी कैरी का मीठा आचार बनाना  रविवार को रामायण का एपिसोड आना  और सड़को का तब सुनसान हो जाना  अमीन साहनी के बिनाका गीत माला  और लता का "मिले सुर मेरा तुम्हारा " फ़ौरन रिटर्न' भाईओं से ईर्ष्या लगाना  पर उनसे ही फिर कई तोहफ़े मंगाना  अमरीका जाने के सुहाने सपने सजाना  भविष्य की उम्मीद पे छुप के'...

कौन हूँ मैं

है द्वन्द  मेरा मुझसे ही हूँ तंग खड़ा खुदसे ही हर वार मेरा मुझपे ही हर हार मेरी मुझसे ही हो संतुष्ट मैं मोक्ष को पाऊँ या भर उड़ान तारे गिन आऊं कल कल कर के बहता जाऊं या हुंकार की गूँज लगाऊँ मुस्कुरा के सदा सबको अपनाऊं या उठा आवाज़ परिवर्तन लाऊँ बन अशोक मैं शोक मनाऊँ या जीत जगत, सिकंदर कह लाऊँ जल सूरज सा जग चमकाऊँ या चाँद सी शीतलता बिखराऊँ बन कृष्ण शब्द जाल बिछाऊँ या मर्यादा पुरुषोत्तम कह लाऊँ हर तर्क मेरा मुझे ही हर प्रश्न मेरा मुझसे ही है व्यंग्य मेरा मुझपे ही है द्वन्द मेरा मुझसे से