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Showing posts from February, 2015

ढूंढ़ते रह जाओगे

दिवाली में घर को रंगाना पूताना कचरे हटा कर फिर उसको सजाना  सड़क पे बोतल मे राकेट का उड़ाना  मोहल्ले में बड़ो का आशीर्वाद पाना  होली में पानी के गुब्बारे बनाना  पडोसी की टंकी में रंगो को मिलाना  नहा कर दोबारा फिर रंगीन हो जाना और हफ्ते भर घस उन रंगो को छुड़ाना  छुट्टिओं में रिश्तेदारों  से मिलने जाना  बड़े बुजुर्गो का फिर वो कहानी सुनाना   फर्श पर फिर सबके बिछावन लगाना  और सोने की जगह  बस गप्पे लड़ाना  मूंगफली के छिलकों का पहाड़ बनाना  आम को पेड़ो से चुरा  कर के खाना  भरी धूप में उन पापड़ों को सुखाना  खट्टी कैरी का मीठा आचार बनाना  रविवार को रामायण का एपिसोड आना  और सड़को का तब सुनसान हो जाना  अमीन साहनी के बिनाका गीत माला  और लता का "मिले सुर मेरा तुम्हारा " फ़ौरन रिटर्न' भाईओं से ईर्ष्या लगाना  पर उनसे ही फिर कई तोहफ़े मंगाना  अमरीका जाने के सुहाने सपने सजाना  भविष्य की उम्मीद पे छुप के'...

कौन हूँ मैं

है द्वन्द  मेरा मुझसे ही हूँ तंग खड़ा खुदसे ही हर वार मेरा मुझपे ही हर हार मेरी मुझसे ही हो संतुष्ट मैं मोक्ष को पाऊँ या भर उड़ान तारे गिन आऊं कल कल कर के बहता जाऊं या हुंकार की गूँज लगाऊँ मुस्कुरा के सदा सबको अपनाऊं या उठा आवाज़ परिवर्तन लाऊँ बन अशोक मैं शोक मनाऊँ या जीत जगत, सिकंदर कह लाऊँ जल सूरज सा जग चमकाऊँ या चाँद सी शीतलता बिखराऊँ बन कृष्ण शब्द जाल बिछाऊँ या मर्यादा पुरुषोत्तम कह लाऊँ हर तर्क मेरा मुझे ही हर प्रश्न मेरा मुझसे ही है व्यंग्य मेरा मुझपे ही है द्वन्द मेरा मुझसे से